सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर एक साल का प्रतिबंध लगाया, याचिकाएं खारिज कीं. कोर्ट ने वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर गंभीर असर का हवाला दिया. आदेश का सख्ती से पालन होगा.

हाइलाइट्स
- सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में पटाखों पर एक साल का प्रतिबंध लगाया.
- कोर्ट ने वायु गुणवत्ता और स्वास्थ्य पर गंभीर असर का हवाला दिया.
- सभी राज्यों को आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश.
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने आज दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के उपयोग, निर्माण, बिक्री और भंडारण पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया और प्रतिबंध हटाने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में वायु गुणवत्ता लगातार बिगड़ रही है, और केवल 3-4 महीनों के लिए प्रतिबंध प्रभावी नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला दिया, जो प्रदूषण मुक्त पर्यावरण में जीने के अधिकार की गारंटी देता है.
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि दिल्ली में सभी लोगों के पास एयर प्यूरीफायर नहीं होता, और प्रदूषण से आम जनता की सेहत पर गंभीर असर पड़ता है. कोर्ट ने जोर देकर कहा कि दीवाली या अन्य त्योहारों के दौरान पटाखों से होने वाला प्रदूषण स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक है, इसलिए लंबे समय तक सख्त कदम उठाने की जरूरत है.
इससे पहले, दिल्ली सरकार और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने कोर्ट को बताया था कि सर्दियों में वायु प्रदूषण पहले ही चरम पर होता है, और पटाखों से यह और बढ़ जाता है. सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि पिछले वर्षों में पटाखों पर अस्थायी प्रतिबंध के बावजूद वायु गुणवत्ता में सुधार नहीं हुआ, जिसने इस कदम को और मजबूत किया.
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प्रतिबंध के खिलाफ कुछ पक्षकारों ने तर्क दिया था कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और परंपराओं पर हमला है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा सर्वोपरि है. सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और अवैध पटाखों की बिक्री पर नजर रखें. यह फैसला दिल्ली और एनसीआर के निवासियों के लिए साफ हवा की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.