जस्टिस वर्मा के खिलाफ चाहकर भी कुछ नहीं कर पाएगी पुलिस! पहले ही कर लिया खुद को क्‍लीन बोल्‍ड, रिपोर्ट बयां कर रही सबकुछ

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Justice Yashwant Verma Currency Note Burn Case: दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के घर लगी आग में जले नोटों पर दिल्‍ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. पुलिस ने नोट सीज नहीं किए, जस्टिस वर्…और पढ़ें

जस्टिस वर्मा के खिलाफ चाहकर भी कुछ नहीं कर पाएगी पुलिस! रिपोर्ट बयां कर रही सब

हाइलाइट्स

  • जस्टिस वर्मा के घर आग में जले नोटों पर सवाल उठे.
  • पुलिस ने जले नोट सीज नहीं किए, जस्टिस वर्मा ने इनकार किया.
  • जांच कमेटी पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर सकती है.

Justice Yashwant Verma Currency Note Burn Case: दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर लगी रहस्यमयी आग के मामले में दिल्ली पुलिस की कार्य प्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं. सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर दिल्ली पुलिस ने चार-पांच बोरे जले नोट देखें तो उन्हें सीज क्यों नहीं किया? जैसा कि कोर्ट द्वारा जारी दस्तावेज में कहा गया है. जांच कर रही कमेटी इस मामले में दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर रूख अपना सकती है.

जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर लगी आग के बाद जो रिपोर्ट सरकारी तौर पर सामने आई उसमें पुलिस की तरफ से कहा गया है कि उक्त कमरे में आग पर काबू आने के बाद चार-पांच अधजली बोरिया मिली है. जिनके अंदर भारतीय मुद्रा भरे होने के अवशेष मिले हैं. यदि पुलिस को यह जले नोट मिले थे, जैसा कि उसने अपनी रिपोर्ट में दावा किया तो उसने उन्हें जप्त क्यों नहीं किया. भारतीय मुद्रा का जलना अपने आप में एक कानूनी अपराध है और पुलिस को इस पर संज्ञान लेना चाहिए था. लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया क्या? मौके पर मौजूद अधिकारी किसी दबाव में थे?

अब कैसे साबित होंगे आरोप?
मामले का दिलचस्प तथ्य यह भी है कि जस्टिस वर्मा ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को जो जवाब दिया है उसमें साफ तौर पर कहा है कि घटना वाली रात ना तो उनके परिवार को ना ही किसी स्टाफ को और ना ही किसी सुरक्षा कर्मी को कथित जले नोट दिखाए गए. उन्होंने स्पष्ट तौर पर इनकार किया है कि वहां कोई नोट जले ही नहीं थे. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पुलिस अपने इस आरोप को किस तरह से साबित करेगी. क्योंकि मौके से जो कथित वीडियो या फोटो खींचे गए हैं उन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के टाइम में पूरी तरह से तब तक यकीन नहीं किया जा सकता जब तक की उसका कोई सपोर्टिंग एविडेंस ना हो.

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दिलचस्प यह भी है कि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि उन्हें घर के एक सुरक्षा गार्ड ने बताया कि कल सुबह कमरे से मलबा और अन्य आंशिक रूप से जले हुए सामान को हटा दिया गया था. यानी पुलिस की थ्योरी पर विश्वास करें तो उसके पास अब कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि वहां नोट जले थे. जब पुलिस के पास कोई सबूत ही नहीं है तो उसने इतनी बड़ी रिपोर्ट आखिर कैसे हाई कोर्ट तथा अन्य जगहों पर कैसे सबमिट की. क्योंकि बिना सबूत के तो कोर्ट तो छोड़िए आम आदमी भी विश्वास नहीं करेगा. दिल्ली पुलिस के एक आला अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अमूनन आग की कॉल पर यदि किसी बड़े जानमाल या कोई बड़े पैमाने पर नशीला द्रव्य आदि न दिखे तो जब्ती नहीं की जाती है. यह माना जाता है कि यह घर का अंदरूनी मामला है. यदि जहां आग लगी है वहां कोई शिकायत देता है तो उस पर कार्रवाई की जाती है.

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