जिसका डर था वही हुआ, सोरोस के बहाने पर्दे के पीछे से बाइडेन देना चाहते थे भारत को जख्‍म! ED की जांच में खुलासा

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America News: अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस पर आरोप है कि उन्‍होंने भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने के लिए यहां कई एनजीओ को फंडिंग की. ईडी का दावा है कि यह रकम USAID के माध्‍यम से अमेरिका की जो बाइडेन सरकार से सोरोस…और पढ़ें

सोरोस के बहाने बाइडेन देना चाहते थे भारत को जख्‍म! ED का खुलासा

हाइलाइट्स

  • जोर्ज सोरोस के खिलाफ बीते दिनों ईडी ने भारत में छापेमारी की थी.
  • जांच में पता चला कि सोरोस को USAID के जरिए आठ करोड़ मिले.
  • बाइडेन काल में मिली इस रकम को भारत विरोधी गतिविधियों में यूज किया गया.

America News: अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस को लेकर जारी ईडी की जांच के दौरान नए चौकाने वाले खुलासे सामने आए हैं. ईडी का दावा है कि अमेरिका से आठ करोड़ रुपये की फंडिंग लेकर सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन यानी OSF भारत विरोधी एजेंडा चला रही थी. खुद अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने भी हाल ही में जो बाइडेन सरकार पर हमला बोलते हुए USAID यानी यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के जरिए विदेशी फर्म को चंदा देकर वहां अपना एजेंडा चलाने का आरोप लगाया था. ईडी का दावा है कि सोरोस ने अमेरिका के USAID से भारी-भरकम फंडिंग लेकर भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश रची थी. ईडी ने भारत को कमजोर करने वाली सोरोस की साजिश को अब नाकाम कर दिया है.

भारतीय जनता पार्टी संसद में कई बार नेहरू-गांधी परिवार के सोरोस से संबंध का मुद्दा उठा चुके हैं. ईडी की ताजा कार्रवाई में पता चला है कि सोरोस की संस्था ओएसएफ ने FEMA (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) का उल्लंघन करते हुए भारत में कई NGO को करोड़ों रुपये का फंड मुहैया कराया था. अब टाइम्‍स ऑफ इंडिया अखबार ने सूत्रों के हवाले से लिखा कि USAID के जरिए भी बड़ी रकम भारत में पहुंचाई गई, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को अस्थिर करने के लिए किया जाना था. ईडी ने हाल ही में बेंगलुरु में ओएसएफ से जुड़े 8 ठिकानों पर छापेमारी की थी. इस दौरान दस्तावेजों के ढेर जब्त किए थे, जिनसे इस साजिश का पर्दाफाश हुआ.

भारत में अराजकता फैलाने के लिए हुआ सोरोस-USAID गठजोड़
जांच एजेंसी का कहना है कि सोरोस और USAID का यह गठजोड़ भारत में अराजकता फैलाने की कोशिश का हिस्सा था. करीब 25 करोड़ रुपये की एक मनी ट्रेल का खुलासा हुआ है, जो विदेशी निवेश के नाम पर शेल कंपनियों के जरिए भारत लाई गई. ईडी ने इसे पूरे मामले में दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है. सूत्रों का दावा है कि इस फंडिंग का मकसद कुछ खास राजनीतिक दलों और संगठनों को मजबूत करना था, जो सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में जुटे थे.

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USAID को लेकर अमेरिका पर उठे सवाल
इस खुलासे के बाद सियासी हलकों में हड़कंप मच गया है. सत्तारूढ़ दल ने सोरोस पर पहले भी भारत विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाया था, और अब USAID के कथित रोल ने मामले को और गंभीर बना दिया है. ईडी अब इस बात की तह तक जा रही है कि USAID से मिले फंड का अंतिम इस्तेमाल कहां और कैसे हुआ. जांच के नतीजे आने के बाद सोरोस और उनके सहयोगियों पर बड़ी कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. यह मामला न सिर्फ भारत-अमेरिका संबंधों पर सवाल उठा रहा है, बल्कि विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग पर भी बहस छेड़ रहा है. ईडी की यह कार्रवाई सोरोस की साजिश को बेनकाब करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है.

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