Amit Shah on Waqf Bill: लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक पर बहस के दौरान अमित शाह ने TMC सांसद सौगत राय पर निशाना साधा और विपक्ष के असंवैधानिक आरोपों का जवाब दिया.

हाइलाइट्स
- अमित शाह ने वक्फ बिल पर TMC सांसद सौगत राय पर निशाना साधा.
- विपक्ष ने वक्फ बिल को असंवैधानिक करार दिया.
- अमित शाह ने वक्फ संपत्ति के दान पर आपत्ति जताई.
नई दिल्ली: मंगलवार को लोकसभा में विवादास्पद वक्फ (संशोधन) विधेयक पर बहस शुरू हुई, जिसमें सरकार इसे आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है, जबकि विपक्ष इसे ‘असंवैधानिक’ करार देने में एकजुट है. इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में वक्फ विधेयक पर बहस के दौरान सरकार का पक्ष रखा. इस दौरान उन्होंने TMC सांसद सौगत रॉय पर निशाना साधा.
वक्फ बिल पर जवाब देते हुए अमित शाह ने सौगत राय पर निशाना साधते हुए कहा, मैं दादा की टेंशन समझ रहा हूं कि बंगाल के मुसलमान भी सुन रहे हैं तो उनको टेंशन होना स्वाभाविक है. हम ऐसा नहीं लिख रहे हैं कि कोर्ट में नहीं जा सकते. आपने तो कर दिया था कि एक ऑर्डर को कोई कोर्ट में चैलेंज नहीं कर सकता. पूरा संविधान समाप्त कर दिया.
संबंधित खबरें
- हिंदू नव वर्ष भव्य रूप से मनाएगी दिल्ली सरकार, नवरात्रि में फलाहार कार्यक्रम
- 3 अप्रैल से लगने जा रहा है स्टार्टअप्स का मेला, भारत मंडपम में ऐतिहासिक आयोजन
- दिल्लीवालों, CM रेखा गुप्ता देने जा रहीं एक खुशखबरी,प्रवेश वर्मा ने दिया भरोसा
- वक्फ विधेयक पास होने बाद जामा मस्जिद के शाही इमाम ने दिया बड़ा बयान
अमित शाह का दिखा तीखा तेवर
उन्होंने आगे कहा आपत्ति क्या है? वक्फ तो दान है भाई और दान अपनी संपत्ति का किया जा सकता है. किसी और की संपत्ति का नहीं किया जा सकता. गांव में कोई बेचारा अमेरिका गया है. चार महीने पढ़ने के लिए घूमने के लिए आता है तो के वक्त घोषित हो गए. कोई कारोबार करने के लिए दिल्ली आया. आता है तो के वक्फ घोषित हो गया.
हम वोट बैंक के लिए बिल लेकर नहीं आएंगे- अमित शाह
अमित शाह ने आगे कहा, ‘हम वोट बैंक के लिए कोई बिल लेकर नहीं आएंगे. सबको अपना धर्म का अनुसरण करने का अधिकार है. कोई शौक से करें मगर लोभ, लालच, भय से धर्म परिवर्तन नहीं कराया जा सकता. किसी गरीब के पास खाना नहीं है. खाना देकर उसका धर्म बदल दोगे. चर्चा आपके अनुरूप चर्चा नहीं हो सकती. यह सदन में हर सदस्य बोलने के लिए स्वतंत्र है. कोई परिवार की चलती नहीं है. हम जनता के नुमाइंदे है. किसी की कृपा से नहीं आए हैं.’
अमित शाह ने आगे कहा अभी अभी फैशन है संविधान लहराने की. यह संविधान के हिसाब से सरकार का या सरकार का या किसी भी निजी संस्था का कोई पर कोई भी फैसला मान्यवर कायदे की कोर्ट से बाहर कैसे हो सकता है? कोई भी फैसला हो, यह देश की अदालत वह फैसले तक रुचि नहीं रखेगी. नागरिक जीवन से लेकर कहां जाएंगे, जिसकी भूमि हड़प कर ली गई, वह कहां जाएगा? ऐसा नहीं चलेगा. आपकी वोट बैंक के लिए आपने क्या किया था? हम खारिज कर रहे हैं.